दो दिन तक मैं मधु का इंतज़ार करता रहा, पर वो ना आई। मन में एक अजीब-सी बेचैनी थी, जैसे कोई तूफान अंदर उठ रहा हो। मैं किसी से कुछ कह नहीं सकता था, बस अपने मन को तसल्ली देता रहा। तीसरे दिन, मैं टूट गया। शाम को दो पैग शराब के गटक लिए और रात 9 बजे घर पहुँचा। जैसे ही बेडरूम में घुसा, मेरा दिल धक से रह गया। मधु रानी रंग की साड़ी में बिस्तर पर सो रही थी। उसके खुले बाल बिखरे हुए, ब्लाउज में उसकी जवानी उभरी हुई, और नाइट बल्ब की मद्धम रोशनी में वो किसी स्वर्ग की अप्सरा-सी लग रही थी। उसका गोरा चेहरा, गुलाबी होंठ, और साड़ी में लिपटा हुआ बदन—मानो मेरे सारे होश उड़ा रहा था। मैंने बैग एक तरफ रखा, मुँह-हाथ धोए, कपड़े बदले, सिर्फ बनियान और अंडरवियर में रह गया। गेट पर ताला मारा और सीधा उसके पास चला गया। उसके रसीले होंठों को चूमने लगा, एक-दो नहीं, चार-पाँच गहरे चुंबन लिए। मेरे होंठों का स्पर्श पाते ही मधु की आँखें खुल गईं। उसकी वो शर्त मैंने पूरी कर दी थी, जो उसने मुझसे माँगी थी।
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