मेरा नाम नीलम है, उम्र 19 साल। पिछले कुछ हफ्तों से मेरे दिमाग में बस अरविन्द सर की वो जंगली चुदाई घूम रही थी।
उनकी दी हुई सीडी अब पुरानी हो चुकी थी, अब वो मुझे व्हाट्सएप पर देसी पोर्न वीडियो भेजते थे। रात को जब मम्मी सो जातीं, मैं चुपके से फोन खोलती। लड़कियाँ चीख-चीखकर लंड माँग रही होती थीं, उनकी सिसकारियाँ मेरे कानों में गूँजतीं। मेरी साँसें तेज हो जातीं, और मेरी चूत में हल्की सी गुदगुदी शुरू हो जाती। मैं अपनी जाँघें रगड़ लेती, कभी-कभी उंगली से अपनी चूत को हल्का सा सहलाती, पर ज्यादा नहीं। मैं चाहती थी कि असली मजा सर के साथ मिले। मम्मी अब ज्यादातर घर पर ही रहती थीं, तो सर और मुझे चुदाई का मौका नहीं मिल रहा था। ट्यूशन में सर मेरे पास बैठते, किताब के पीछे से मेरे बूब्स को हल्का सा दबाते, और मेरे कान में फुसफुसाते, “नीलम, तेरी चूत की आग कब बुझाऊँ?” मैं शरम से लाल हो जाती, मेरी धड़कन बढ़ जाती, और धीरे से कहती, “सर, आप ही कोई जुगत लगाइए। मैं तो तड़प रही हूँ।”




Write a comment ...